रफा दफा -A.Kumar

posted Sep 25, 2014, 4:55 AM by A Billion Stories
आशीष एटीएम से पैसे निकाल ही रहा था की एक होशियार ने उसको चालाकी से दूसरी तरफ घूमा दिया और जब तक आशीष उसको देख पाता वो उसके दस हज़ार रुपए लेकर बाहर की तरफ निकल गया। बस एक गलती वो कर गया की एटीएम मशीन से पर्ची नहीं ले पाया। और उसी पर्ची के बाहर आते आशीष को मालूम पड़ा की उसके रुपए कोई दूसरा निकाल गया।

वो घबराया हुआ बहार आया तो देखा वो बदमाश कार में बस बैठ कर निकलने ही वाला था। 18 साल के आशीष ने दौर लगा दी और कार के सीसे को तोड़ते हुए उस बदमाश की गर्दन पकड़ ली। गाडी के साथ वो रोड पर घिसट गया पर गाडी छोटी थी आल्टो जैसी कोई गंभीर चोट नहीं आई। पर हाथ में सीसे घुस गए थे। फिर चलती गाडी से ही उसने गाडी की चाभी निकाल ली। अब तो वो बदमाश जिसका नाम आसिफ था, उसने घबराकर उसको पैसे वापस करने चाहे। पर देर हो चुकी थी। आसिफ घिर चूका था। भीड़ ने उसकी ठीक से मरम्मत की और उसको पुलिस के हवाले कर दिया गया।

आशीष ने बहादुरी का काम किया था पर फिर भी थाने में उसके रुपए जमा हो गए और अपना इलाज उसको खुद कराना पड़ा। दो दिन तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई और वो थाने के चक्कर काटता रहा। आसिफ बिना कोर्ट में पेश हुए 48 घंटे से ज्यादा हवालात में रह लिया। शायद पुलिस कुछ लेन देन करके मामला ख़त्म कर देना चाहती थी।

इधर आशीष को कॉलेज की फीस भरनी थी - वो थाने के चक्कर अलग लगा रहा था। आखिर लेन देन वाला मामला भी सेट नहीं हुआ। राजीनामा में मन चाही रकम का मामला सही नहीं बैठा और तब तक प्रेस वाले को भी खबर हो गयी।

आखिर FIR तीसरे दिन दर्ज हुई और फिर पेपर में खबर छपी जो इस प्रकार थी - 'एटीएम में लोगों को मदद करने के नाम पर पैसे उड़ा ले जानेवाले को पुलिस ने दो किलोमीटर दौरा कर पकड़ा। ' न बंदी प्रतिक्षीकरण के तहत न आसिफ को समय पर कोर्ट मिला और न आशीष को समय पर उसके रूपए।
पुलिस भी क्या करे। संख्या है नहीं और काम ज्यादा। एक एक पुलिस वाले को रोज 20 -20 घंटे तक काम करना पड़ता है और वो भी सीमित वेतन में। अब रफा दफा ना हो तो क्या हो।

-A.Kumar

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Submitted by: A.Kumar
Submitted on: Thu Sep 18 2014 12:36:13 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


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