हिन्दी मुहवरे - 2 -देवसुत

posted Oct 19, 2013, 12:17 PM by A Billion Stories

-1-
मुँह में राम बगल में छुरी

अर्थः ऊपर से मित्र भीतर से शत्रु।

-2-
मुँह माँगी मौत नहीं मिलती

अर्थः अपनी इच्छा से कुछ नहीं होता।

-3-
मुफ्त की शराब काज़ी को भी हलाल

अर्थः मुफ्त का माल सभी ले लेते हैं।

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मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक

अर्थः सीमित दायरा।

-5-
मोरी की ईंट चौबारे पर

अर्थः छोटी चीज का बड़े काम में लाना।

-6-
म्याऊँ के ठोर को कौन पकड़े

अर्थः कठिन काम कोई नहीं करना चाहता।

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यह मुँह और मसूर की दाल

अर्थः औकात का न होना।

-8-
रंग लाती है हिना पत्थर पे घिसने के बाद

अर्थः दु:ख झेलकर ही आदमी का अनुभव और सम्मान बढ़ता है।

-9-
रस्सी जल गई पर ऐंठ न गई

अर्थः घमण्ड का खत्म न होना।

-10-
राजा के घर मोतियों का अकाल?

अर्थः समर्थ को अभाव नहीं होता।

-11-
रानी रूठेगी तो अपना सुहाग लेगी

अर्थः रूठने से अपना ही नुकसान होता है।

-12-
राम की माया कहीं धूप कहीं छाया

अर्थः कहीं सुख है तो कहीं दुःख है।

-13-
राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी

अर्थः बराबर का मेल हो जाना।

-14-
राम राम जपना पराया माल अपना

अर्थः ऊपर से भक्त, असल में ठग।

-15-
रोज कुआँ खोदना, रोज पानी पीना

अर्थः रोज कमाना रोज खाना।

-16-
रोगी से बैद

अर्थः भुक्तभोगी अनुभवी हो जाता है।

-17-
लड़े सिपाही नाम सरदार का

अर्थः काम का श्रेय अगुवा को ही मिलता है।

-18-
लड्डू कहे मुँह मीठा नहीं होता

अर्थः केवल कहने से काम नहीं बन जाता।

-19-
लातों के भूत बातों से नहीं मानते

अर्थः मार खाकर ही काम करने वाला।

-20-
लाल गुदड़ी में नहीं छिपते

अर्थः गुण नहीं छिपते।



Photo by:
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Mar 09 2013 09:33:29 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi
Copyright: Copy Free


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