आस -Aashirwad

posted Jan 22, 2015, 11:17 AM by A Billion Stories
कुछ ख्वाब अधूरे से
कोई प्यास अधूरी सी
इन आँखों में क्यूँ हैं
एक आस अधूरी सी

राह पर जमी रही ये नज़रें
इंतज़ार की इन्तहा होने को आई
फिर भी ना माने मन बावरा
तकता रहा किसी के दीदार मे
ख्वाइश थी मुकम्मल जहाँ बसाने की
रिश्तो के बाज़ार मे

दिन थे वो सुहानी थी रातें भी खुशनुमा
थे हज़ारों परवाने रोशन मोहब्बत के नाम पर
मेरे दिल का मिजाज़ भी था आशिकाना
कम्बख़त था मेरा और धड़कता था किसी और के नाम से
इश्क के सफ़र में हमसफ़र दिलनशी था
दिलबर की अदाओं का आलम हसीं था

फिर शाम घिर आई हैं
फिर यादों का वो घेरा हैं
तेरे निशाँ की तलाश में
खोया चैन-ओ-सुकून मेरा हैं

इस शब् के सियाह साये में
खामोशी हैं, वीरानी हैं
तेरे बिना अधूरी, बिन तेरे अनकही
कुछ ऐसी मेरी कहानी हैं |

-Aashirwad

Photo by:
Submitted by: Aashirwad
Submitted on: Mon Feb 17 2014 00:18:27 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


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