हमारी शहादत -Hindustani

posted Jan 4, 2015, 4:43 AM by A Billion Stories
कत्लेआम करके अल्लाह के लोगो का, हत्यारे बने आज रहबर है,
ग़ालिब के रूह की ज़ुबाँ भी उन्हें ख़ाक में मिलने की बददुआ देती होगी।
कहते होंगे अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ ज़न्नत में भाई राम प्रसाद बिस्मिल से,
क्या यही है सिला देश को आज़ाद कराने में हमारी शहादत का?
है कसम तुझको हमारी और हिंदुस्तान के आबरू की,
सर कलम कातिलो का करना ही होगा हिन्दू-मुस्लिम एकता की धार से।
इंकलाब और वन्देमातरम बोल कर इंसानियत की हिफाज़त करनी होगी,
ये आगाज़ है काले अंग्रेजो और फसादियो को खदेड़ने का।।

-Hindustani

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Submitted by: Hindustani
Submitted on: Wed Dec 31 2014 10:08:48 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


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