जीवन की डगर -amalik

posted Oct 6, 2013, 11:02 AM by A Billion Stories   [ updated Oct 13, 2013, 9:42 PM ]
 
सुनसान अनजानी डगर है यह, काँटों भरी
पर मुझे न फिक्र है शूलों की न अंगारों की ।
कुछ लोगों को जाते देखा मैंने, चढ़ कर कुछ कन्धों पर
रौंदते कुछ सपनो को, कुचलते कुछ पांवों को
पर वो लोग भी ज्यादा दूर न जा पाएंगे ,
जो उन्हें सहारा देते हैं, इक दिन बोझ तले मर जायेंगे
तब कौन उन्हें पार कराएगा?
कातर आँखे , दया की भीख तब कुछ काम न आयेंगी,
खून से लथपथ पाँव जिस दिन अगला कदम बढ़ाएगा,
याद रखना दोस्तों, ये इतिहास
नया लिखा जायेगा |

-amalik
 


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Submitted by: amalik
Submitted on: Sat Oct 05 2013 03:09:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi
Copyright: A Billion Stories (http://www.abillionstories.com)


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