फसल की फाँसी -aditya Sun Jul 14 2013 18:23:38 GMT-0700 (PDT)

posted Jul 14, 2013, 6:23 PM by A Billion Stories
अब फिर , मॉनसून आया है ।
बुझ रही , धरती की ये आग ।
नदियाँ हँस रही , पोखरें नाच रहे ।
तितली उड़ रही , मेंढक गा रहे ।
फिर भी कोई रो रहा है , कह रहा है ।
अब आके क्या , जब फसल को हो गई फाँसी ।
अब तो भूख करेगी , मेरी वर्षा ।
फसल की फाँसी से होगी , अब मुझको फाँसी ।
-aditya

Submitted on: Sun Jun 09 2013 00:00:29 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
Language: Hindi
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