भगवान -जिज्ञासु Sun Sep 22 2013 05:01:44 GMT-0700 (PDT)

posted Sep 22, 2013, 5:01 AM by A Billion Stories
भगवान !
कहीं बैठा है जो तू मजे से
कभी हो समय तो जरा
नीचे आकर देख अपने बच्चों को
जिनपर थोपी गयी है तुम्हारी मर्जी
कैसे विवश हैं जीने को
क्यूँ इतनी विषमताएं
कर रखी हैं व्याप्त ?
जब तू कहता है
सभी तेरे प्यारे हैं ?
क्यूँ देता है किसी को
रोटी के लाले
क्यूँ कहीं कोठियाँ अनाजों से
भरी होती है...
कोई उड़ता है वातानुकूलित
मोटरों मे
किसी को पैरों से भी
वंचित कर देता है...
अब
या तो तू आकर अपना
सामर्थ्य सिद्ध कर
या फिर पालनहार बनने का
स्वांग त्याग दे
फिर हम भी तुझे छोड़कर
अपने-अपने हिस्से के
भगवान खुद बन जाएंगे|
-जिज्ञासु

Submitted on: Fri Sep 20 2013 13:33:01 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
Language: Hindi
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