ह्रदय का क्रंदन -Amar

posted Mar 19, 2016, 8:31 AM by A Billion Stories
ह्रदय का क्रंदन या प्रिये का वंदन
या करूँ शंखनाद
अंजुली भर भर अनादर मैं पी चूका
जहर तेज था मैं जी चूका

प्रिये अब तो समझ जाओ
अप्रिय बोल से जी ना जलाओ
मैं जो जला तो तुम्हे क्या सुख दे पाउँगा ?
अंदर के अनल में जल अंदर राख बन जाऊंगा

जो जल जायेगा मन
तन का मोल ना रह जायेगा
तन दिखेगा सुन्दर बस एक
खोल ही तो रह जाएगा

हम नही मिले लड़ने के लिए
अभी तो तवा पर आरजू भी ना हुई
पास रहकर प्रेम की की एक ग़ुफ़्तगू ना हुई

कभी आओ प्रिये अपनी मर्जी से
साथ रहकर देखो की इन झगड़ों में
कितना रस है ,क्योँ दूर हो
खुदगर्जी से।

-Amar

Photo by: -
Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 13:55:48 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


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