एक राही और उसकी मृग तृष्णा।। -Nikita Parik Fri Feb 15 2013 18:54:06 GMT-0800 (PST)

posted Feb 15, 2013, 6:54 PM by A Billion Stories
भांति भांति का मनुष्य
हर मनुष्य में मनुष्य अनेक।
लोगों के इस बवंडर में फंसा , 
वो एक राही , और उसकी मृग तृष्णा ...

भावनाओं का एक समुद्र विशाल,
समुद्र की बदलती दिशाएं हज़ार,
भावनाओं के इस सागर में खोया ...
वो एक राही और उसकी मृग तृष्णा ।

ज़िन्दगी की रण -भूमि में
तलवार उठाये अपने ही खिलाफ।।
आदर्शों की लड़ाई में हारा ..
वो एक राही और उसकी मृग तृष्णा ।।

गुंजन स्वरों की हर दिशा में ,
स्वरों की उलझन खामोश राहों में ,
स्वरों के शब्दों में उलझता चला ,
वो एक राही और उसकी मृग तृष्णा ||
-Nikita Parik

Submitted on: Tue Feb 12 2013 00:52:35 GMT-0800 (PST)
Category: Original
Language: Hindi
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