दिल की हम क्या बयाँ करें... -हरेकृष्ण आचार्य Fri Oct 05 2012 10:43:35 GMT-0700 (PDT)

posted Oct 5, 2012, 10:43 AM by A Billion Stories
दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है,
देश तो कब का बाँट दिया, अब तो गली-गली में बंटवारा है|

देश की हम क्या बात करें, जब दिल्ली ही में अंधियारा है,
आम आदमी को तो कब का बेच खाया, अब तो हर आदमी बेचारा है |

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है...

कश्मीर की हम क्या बात करें, अब तो आसाम में भी हो-हल्ला है,
झारखण्ड की हम क्या बात करें, जब केरल में कश्मीर होने वाला है|

नेत्रत्व की हम क्या बात करें, जब हर नेता हत्यारा है,
भूख से ह्त्या करना, इन्हें जनम जनम से आता है |

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है...

बड़ों की हम क्या बात करें, अब तो बच्चों में भी बंटवारा है,
जब कक्षाओं में प्रवेश जाती-धर्म पर हो, तो और किस चीज़ की हमें आशा है|

दुश्मनों की हम क्या बात करें, जब अपनों ही ने छुरा दिखाया है,
दुश्मनों से प्यार और अपनों पर हमले की जब बात हो, तो क्या ऐसे नेत्रत्व पर हमे भरोसा है?

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है...

आतंक की हम क्या बात करें, जब अपनों ही ने हमसे हफ्ता उठाया है,
जहाँ हफ्ता देने वाला ही ज़ुल्मी कहलाये, उस व्यवस्था पर आम आदमी का क्या भरोसा है?

दूसरों की हम क्यों बात करें, जब आज तक, इन सब बातों से, हम ही ने मुंह फेरा है,
कहाँ भीष्म, कृष्ण, अशोक, अकबर का भारत, अब क्या यही भारत मेरा है?

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है|
-हरेकृष्ण आचार्य

Submitted on: Fri Sep 21 2012 11:52:55 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
Language: Hindi
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