महाबंदर -देवसुत

posted Dec 23, 2011, 8:41 AM by A Billion Stories
मैं महा बंदर

मुझे पूँछ नहीं है, पर मूंछ है
शक्ति नहीं है पर दिमाग है
ऐसा मैं सोचता हूँ|

मैं एक पेड़ से दुसरे पेड़ कूदना नहीं जानता
और न ही अब कोई पेड़ बचे हैं मुझे कूदने के लिए
और हाँ, मैं दो पाँव पे ही नहीं, सीधा भी चलता हूँ
अभी तक|

मैं सब कुछ खाता हूँ,
केला ही नहीं, करेला भी, भेड़ ही नहीं, बन्दर भी,
मछली ही नहीं, मगरमच्छ भी,
सूअर ही नहीं, गाय भी|

मैं गाय-भैंस भी पालता हूँ,
गाय का दूध पीकर बड़ा होता हूँ,
बड़ा हो कर,
उसी बुढ़ियाई गाय को बेचकर, पैसे गिनता हूँ|

मैं कपडे पहनता हूँ, और जूते भी,
कपड़े, रेशम के कीड़ों को उबाल कर,
जूते, भैंस के चमड़े को उधाड कर,
आखिर सूत के कपड़ों में, रेशम की चमक कहाँ?

में गाड़ी भी चलाता हूँ, और कुत्ते भी पालता हूँ,
कुत्ते होते हैं बहुत वफादार,
पर गाड़ी के सामने आये कुत्तों को, रौंद डालता हूँ,
साले कुत्ते !

मैं महाबंदर,
मुझे दोस्त चाहिए, पर दोस्ती नहीं,
मुझे पैसे चाहिए, पर काम नहीं,
मुझे गद्दी चाहिए, पर ज़िम्मेदारी नहीं,

मुझमे इतने गुण हैं,
इसीलिए तो हूँ मैं और सिर्फ मैं,
महाबंदर|
-देवसुत

Submitted on: Fri Dec 23 2011 06:05:05 GMT-0800 (PST)
Category: Original
Language: Hindi
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