Hindi Poems

You have written nice poems in your diaries or a piece of paper but they have been lying in your cupboard?
It is time you did something about it!
Submit it here to keep your language and culture alive.
Just do your bit.

Be the one to SUBMIT.

On the SUBMIT page, use the online keyboard to type in your language - then copy-paste into the form. Do not forget to press the SUBMIT button after filling the form.

A Billion Stories: Built for India.

Hindi Poems

  • जीवन... 03.12.2018 00:41:19 जीवन - यज्ञ है जब ,मैं - नहीं है और सब - मैं है तब ,जीवन - यज्ञ है | कैसे , कब , क्या, कहाँ - सब ,सीखो जब और ...
    Posted Dec 2, 2018, 11:11 AM by A Billion Stories
  • क़दम मिला कर चलना होगा -Atal Behari Vajpayee बाधाएँ आती हैं आएँघिरें प्रलय की घोर घटाएँ,पावों के नीचे अंगारे,सिर पर बरसें यदि ज्व ...
    Posted Nov 2, 2018, 6:12 PM by A Billion Stories
  • श्री हनुमान चालीसा -Tulsidas दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल च ...
    Posted Sep 9, 2018, 6:34 PM by A Billion Stories
  • सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है -बिस्मिल अज़ीमाबादी सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में हैकरता नह ...
    Posted Sep 13, 2016, 6:37 AM by A Billion Stories
  • तुम्हारा टेलीफून -देवसुत प्यार की बातें बोलकर मुझे बहलाओ मत ,अभी बोलो तुम आओगे कब ?बच्चे रोते हैं, पर पूछते नहीं ह ...
    Posted Sep 4, 2016, 9:05 PM by A Billion Stories
Showing posts 1 - 5 of 55. View more »

जीवन... 03.12.2018 00:41:19

posted Dec 2, 2018, 11:11 AM by A Billion Stories

जीवन - यज्ञ है
जब ,
मैं - नहीं है
और सब - मैं है
तब ,
जीवन - यज्ञ है |

कैसे , कब , क्या, कहाँ - सब ,
सीखो जब
और
"मैंने किया" ,
मत बोलो
तब ,
जीवन - यज्ञ है |

इस राह पर पहला कदम
जब बोलो - सब साथ चलो ,
और चलो - सबको साथ
लेकर ,
खींचकर ,
पसीना तर हो जाओ ,
पर बोलो - मैं नहीं ,
तब ,
पथ तुम्हारा यज्ञ है ,
तब ,
जीवन - यज्ञ है |

सबके आंसू पोंछो ,
पर बोलो - मैं नहीं ,
सबकी भूख मिटाओ ,
पर बोलो - मैं नहीं ,
तब
जीवन - यज्ञ है |

भलों की करो भलाई ,
पर बोलो - मैं नहीं ,
बुरों की करो बुराई ,
और बोलो - सिर्फ - मैं ,
तब
जीवन - यज्ञ है |
देवसुत
 


Photo by: Unknown
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Nov 19 2018 23:27:00 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

क़दम मिला कर चलना होगा -Atal Behari Vajpayee

posted Nov 2, 2018, 6:12 PM by A Billion Stories

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।



उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
 


Photo by:
Submitted by: Atal Behari Vajpayee
Submitted on:
Category: Non-Original work with acknowledgements
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

श्री हनुमान चालीसा -Tulsidas

posted Sep 9, 2018, 6:34 PM by A Billion Stories

दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
 


Photo by:
Submitted by: Tulsidas
Submitted on:
Category: Folklore
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है -बिस्मिल अज़ीमाबादी

posted Sep 13, 2016, 6:37 AM by A Billion Stories

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है

करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है

ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है

खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है

यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है

वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,

हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,

है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,

हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
-------
Editors Note: This work is popularly attributed to Ram Prasad Bismil though he was not the author.

-

Photo by:
Submitted by: बिस्मिल अज़ीमाबादी
Submitted on:
Category: Folklore
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

तुम्हारा टेलीफून -देवसुत

posted Sep 4, 2016, 9:05 PM by A Billion Stories

प्यार की बातें बोलकर मुझे बहलाओ मत ,
अभी बोलो तुम आओगे कब ?
बच्चे रोते हैं, पर पूछते नहीं हैं तुमको ,
हँसकर मैं भी जवाब नहीं देती उनको ।
तुम्हारे पैसों से खाना बनता है, ख़ुशी नहीं ,
बिन बाप के बच्चे, बढ़ेंगे कैसे? पता नहीं !
मुझे पैसों की भरमार नहीं , ख़ुशी चाहिए ,
तुम्हारा हाथ, तुम्हारा साथ चाहिए ।
पैसे अब काफी हैं ज़िन्दगी काटने के लिए ,
बच्चों की देख-रेख और पढ़ाई के लिए ।
बाकी जो बचा, वह कुछ कर लेंगे इधर-उधर ,
अभी बोलो, तुम आओगे कब ?

-देवसुत

Photo by:
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Sep 05 2016 00:00:00 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

सड़क, जोकर - हिंदी बाल कविताएँ -देवसुत

posted Sep 4, 2016, 9:02 PM by A Billion Stories

सड़क
------

सड़क बनी है लंबी चौड़ी
उसमे जाती मोटर दौड़ी
सब बच्चे पटरी पर जाओ
बीच सड़क कभी न जाओ
जाओगे तो दब जाओगे
चोट लगेगी पछताओगे

जोकर
---------
सरकस में है आता जोकर ,
सबका दिल बहलाता है ।
सिर पर लम्बा टोप पहनकर ,
नकली नाक लगता है ।
रंग बिरंगा चेहरा करके,
हँसता और हँसाता है |

-

Photo by:
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Aug 01 2016 22:03:54 GMT+0530 (IST)
Category: Story-Folklore
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

ह्रदय का क्रंदन -Amar

posted Mar 19, 2016, 8:31 AM by A Billion Stories

ह्रदय का क्रंदन या प्रिये का वंदन
या करूँ शंखनाद
अंजुली भर भर अनादर मैं पी चूका
जहर तेज था मैं जी चूका

प्रिये अब तो समझ जाओ
अप्रिय बोल से जी ना जलाओ
मैं जो जला तो तुम्हे क्या सुख दे पाउँगा ?
अंदर के अनल में जल अंदर राख बन जाऊंगा

जो जल जायेगा मन
तन का मोल ना रह जायेगा
तन दिखेगा सुन्दर बस एक
खोल ही तो रह जाएगा

हम नही मिले लड़ने के लिए
अभी तो तवा पर आरजू भी ना हुई
पास रहकर प्रेम की की एक ग़ुफ़्तगू ना हुई

कभी आओ प्रिये अपनी मर्जी से
साथ रहकर देखो की इन झगड़ों में
कितना रस है ,क्योँ दूर हो
खुदगर्जी से।

-Amar

Photo by: -
Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 13:55:48 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

शहर - Part 1 -हरेकृष्ण आचार्य

posted Mar 19, 2016, 8:29 AM by A Billion Stories

क्यों हैं यह रास्ते संकरे ?
क्यों हैं यहाँ बाबू अंधे ?
क्यों हैं यहाँ लोग प्यासे मरते ?
जब बाँध हैं पानी से फूटते ?

कहते हैं शहर में पानी कम है
पर फिर गगन-चुम्भी बनाते क्यों हैं ?
ढक देते हैं क्यों ज़मीं को सीमेंट से?
तालाबों को क्यों भर देते ?

पानी कम नहीं स्वार्थ ज़्यादा है
तालाब से ज़्यादा ज़मीन में फायदा है
फ्लैट बनाएंगे और पानी बेचेंगे
और हम?
फ्लैट में रहेंगे और प्यास से मरेंगे ।

-हरेकृष्ण आचार्य
Penned: 15-6-2010

-हरेकृष्ण आचार्य

Photo by:
Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Mar 05 2016 09:02:50 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

मैं तन्हा प्रिये जागा सारी रात -Amar

posted Mar 19, 2016, 8:28 AM by A Billion Stories

मैं तन्हा प्रिये जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट
बिस्तर पर पड़ती रही अकेलेपन की सलवट
हीर हिर्दय सुलगता रहा
अकेलेपन का नस्तर चुभता रहा
याद तेरी सताती रही पल पल
आँखों से झरना बहा कई बार कलकल

दुःख बड़ा है ये बिरह का
पत्नी होकर भी बिना किसी कारन दूर रहती हो
ये वजह है कलह का

मेरे प्रेम में सम्पूर्णता नही थी
या शादी के मन्त्रों में रही कमी
कारन कुछ भी हो पर प्रिये
मैं आज भी जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट




-Amar

Photo by:
Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 11:17:11 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास -Amar

posted Mar 6, 2016, 6:24 AM by A Billion Stories

हमें कितना प्रेम दिया जब हम छोटे थे
तब नही थी आपको मुझसे आस
आज क्योँ बदल गए आप
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या रिश्तों का आँगन ऐसे ही सिमटेगा
अपनों का दामन बस धन में लिपटेगा
क्योँ नही रहा आपको अपनेपन का एहसास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या धन के लिए मैं कहीं डाका डालूं
कोई घोटाला कर डालूं
अपने को बेच खुद नई नजर में बना डालूं अपना उपहास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

धन से ख़ुशी नही मिलती अप्पा
संतोष बड़ा धन है
सबसे बड़ा धन है आस
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

-Amar

Photo by:
Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 10:59:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi


- Read submissions at http://abillionstories.wordpress.com
- Submit a poem, quote, proverb, story, mantra, folklore, article, painting, cartoon, drawing, article in your own language at http://www.abillionstories.com/submit

1-10 of 55